छत्तीसगढ़ मे साय कैबिनेट पर संगठन की टेढ़ी नजर! कम से कम तीन मंत्रियों पर गिर सकती है गाज, बस्तर को मिल सकता है बड़ा मौका

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में अब सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर मंथन तेज होता दिखाई दे रहा है। हाल में भाजपा की बैठकों में जिला अध्यक्षों और प्रभारियों से मिले फीडबैक में कुछ मंत्रियों की कार्यशैली, कार्यकर्ताओं से संवाद और जनहित से जुड़े मामलों के निराकरण को लेकर शिकायतें सामने आने की खबरें हैं। संगठन ने मंत्रियों को जिला प्रभारियों और जिलाध्यक्षों की बात गंभीरता से सुनने तथा समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने की कड़ी हिदायत चेतावनी के साथ देने की भी खबर जोरो पर है

वहीं विश्वनीय सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार धीरे धीरे राजनीतिक गलियारों में साय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंत्रियों और भाजपा नेताओं के साथ हुई लंबी बैठक के बाद भी कैबिनेट में बदलाव की अटकलें तेज हुई थीं, हालांकि उस समय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फेरबदल की चर्चाओं को खारिज किया था।

अब पार्टी के भीतर चर्चा है कि संगठन के फीडबैक और आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की दोबारा समीक्षा हो सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में पांच मंत्रियों के कामकाज पर संगठन की निगाह होने और इनमें से कम से कम तीन चेहरों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन दावों की पुष्टि पर भाजपा की ओर से पूरी तरह मौन साध कर रखा गया है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि साय मत्रीमंडल मे संभागीय संतुलन भी संभावित बदलाव का अहम आधार बन सकता है। सरगुजा संभाग से मंत्रियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होने और बस्तर को सीमित प्रतिनिधित्व मिलने का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहने के साथ भाजपा मे गुप्त विवाद का कारण बनाता रहा है। जिसमे 2025 के विस्तार के बाद भी बस्तर से एक ही मंत्री रहने की स्थिति पर राजनीतिक विश्लेषण होते रहे हैं।

ऐसे में यदि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो बस्तर को प्रतिनिधित्व बढ़ाने, वरिष्ठता और क्षेत्रीय-जातीय संतुलन को साधने की कोशिश हो सकती है। वहीं कमजोर प्रदर्शन के आरोपों से घिरे मंत्रियों की जगह अनुभवी चेहरों को मौका देने की अटकलें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रही हैं।

छत्तीसगढ़ मे मंत्रीमंडल मे बदलाव को लेकर फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा संगठन ने सरकार के कामकाज और मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर अपनी निगरानी तेज करने के साथ अपनी नाराजगी भी व्यक्त कर दी है। जिससे आने वाले दिनों में यदि संगठन का फीडबैक राजनीतिक निर्णय में बदलता है, तो साय कैबिनेट में बड़ा फेरबदल छत्तीसगढ़ की राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन सकता है। जिसमे सरगुजा संभाग को नुकसान होना निश्चित है

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