खेतो मे जहर के कहर के लिए दोषी कौन – आप, हम, या सरकारे
खेतों में जहर का कहर: दुनिया में कीटनाशक से हर साल 11,000 मौतें -60% अकेले भारत में-आधी किसान आबादी बीमार
1990 की तुलना में दोगुना हुआ कीटनाशकों का इस्तेमाल- – लंबे संपर्क से पार्किंसन और ब्रेन डैमेज का खतरा*होने का अनुमान

*नई दिल्ली –
हरित क्रांति के नाम पर खेतों में छिड़का जा रहा जहर अब किसानों की जान पर बन आया है। सूत्रों के अनुसार पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क के एक वैश्विक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुनिया में हर साल कीटनाशकों के कारण होने वाली विषाक्तता से ग्यारह हजार लोगों की मौत हो जाने का अनुमान है और इन वैश्विक मौतों में लगभग 60% हिस्सा अकेले भारत का बताया जाता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग आधे किसान और कृषि श्रमिक हर साल अनजाने में कीटनाशकों के संपर्क में आकर बीमार पड़ रहे हैं। यानी खेत में काम करने वाला हर दूसरा व्यक्ति अदृश्य जहर की चपेट में है।
1990 से दोगुना हुआ इस्तेमाल–
एक जानकारी के अनुसार 1990 की तुलना में आज दुनिया में दोगुना कीटनाशक इस्तेमाल हो रहा है। भारत में तो हालात और भी बदतर हैं। बिना मास्क, बिना ग्लव्स, नंगे पैर रसायन का छिड़काव आम है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रसायन बनाना और छिड़कना दोनों ही बेहद जोखिम भरा काम है।
कैसे बनता है जहर जानलेवा?-
– कीटनाशक छिड़काव के दौरान सांस और त्वचा के जरिए शरीर में जाता है।
– लंबे समय तक संपर्क में रहने से नर्वस सिस्टम फेल होने लगता है।
– इससे कई नए रोग जन्म ले रहे हैं। वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि लगातार कीटनाशकों के संपर्क से पार्किंसन रोग का खतरा 50% तक बढ़ जाता है, साथ ही दिमाग को स्थायी नुकसान, याददाश्त कमजोर होना, कैंसर और बांझपन जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
भारत क्यों सबसे आगे?-
भारत में 60% मौतों की बड़ी वजहें जो सामने जानकारों के अनुसार आई हैं उनमे सस्ते और बेहद खतरनाक कीटनाशकों का अब भी धड़ल्ले से बिकना, नकली दवाओं का कारोबार, प्रशिक्षण का अभाव और पी पी ई किट का इस्तेमाल न होना मुख्य बताया जाता है
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों की यदि माने तो देश में 50% से ज्यादा छिड़काव मजदूरों द्वारा बिना किसी सुरक्षा के किया जाता है। जो आगे चल कर उनके रोगग्रस्त होने व मौत का कारण बनता है
इस संबंध मे विषय वैज्ञानिको ने चेतावनी दी है कि अगर जैविक विकल्प, जैव कीटनाशक और सुरक्षित छिड़काव तकनीक को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाले दस साल में कीटनाशक रोगों से प्रभावित मौतो का आंकड़ा बीस हजार तक पहुंच जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए इसीलिए अब यह राष्ट्रव्यापी सवाल भी खड़ा होने लगा है कि खेतों को बचाने व ज्यादा उत्पादन के चक्कर में हम अपने कीमती धरोहर किसानों को तो नहीं कहीं खोते जा रहे है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है आप, हम या सरकारे?





