अपराधियों के लिए सरगुजा क्यों बन रहा है भागने का रास्ता? पुलिस की नाकेबंदी में जमशेदपुर फायरिंग के 4 आरोपी गिरफ्तार

सरगुजा पुलिस की मुस्तैदी से अंतरराज्यीय अपराधियों पर शिकंजा
छत्तीसगढ़ – सरगुजा पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण को लेकर की जा रही सक्रिय कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है। जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र में गंभीर फायरिंग की वारदात को अंजाम देकर फरार हुए चार संदिग्ध आरोपियों को सरगुजा पुलिस ने नाकेबंदी कर गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से अर्टिगा वाहन क्रमांक JH 05 EA 7928 भी जब्त किया गया है।

सूचनाओ के अनुसार 26 सितंबर 2026 को पूर्वी सिंहभूम के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित मरीन ड्राइव के उदिपी रेस्टोरेंट में अंधाधुंध फायरिंग हुई थी, जिसमें चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए। सोनारी थाने में संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया।

बताया जाता है कि आरोपियों के छत्तीसगढ़ प्रवेश की सम्भावनाओं को देखते हुए डी आई जी राजेश अग्रवाल ने वाहनों के प्रवेश वाले स्थानों पर कड़ी नाकेबंदी करवाई थी l
इसी दरमियान सीतापुर पुलिस को संदिग्धों के अर्टिगा वाहन से बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर आने की पुष्टि होने पर डीआईजी सरगुजा राजेश अग्रवाल के निर्देश पर बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग सहित संबंधित थाना क्षेत्रों में नाकेबंदी कर जांच शुरू की गई।

इसी दौरान मणिपुर थाना प्रभारी सी.पी. तिवारी एवं पुलिस टीम ने थाना मणिपुर के सामने संदिग्ध वाहन को रोककर चार लोगों को पकड़ा। पूछताछ और झारखंड पुलिस से सूचना साझा किए जाने के बाद आरोपियों की जमशेदपुर की घटना में संलिप्तता की पुष्टि बताई गई। बाद में झारखंड पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड की कार्रवाई की।

लेकिन बड़ा सवाल—सरगुजा ही क्यों?

सरगुजा पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा होता है—झारखंड या ओडिशा में अपराध करने के बाद अपराधियों को छत्तीसगढ़ के सरगुजा की ओर आने की जरूरत क्यों महसूस होती है? क्या अंतरराज्यीय अपराधियों को यहां सुरक्षित ठिकाने, संपर्क या आवाजाही की सुविधा मिलती है? यदि ऐसा है तो वे संपर्क कौन हैं?

क्या अपराधियों को स्थानीय संरक्षण मिलता है?

सरगुजा में यदि बाहरी और खूंखार अपराधियों की आवाजाही लगातार सामने आती है तो पुलिस को केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर उनके स्थानीय संपर्कों, संभावित संरक्षणदाताओं, ठिकानों और आर्थिक नेटवर्क की भी जांच करनी होगी। क्योंकि इसी प्रकार पूर्व मे वासेपुर गैंग से संबंधित सरगना व अन्य सरगुजा मे मिलने वाले व्यवसाहिक तथा राजनैतिक संरक्षण के चलते लम्बे समय से सरगुजा मे व्यापार, राजनीति तथा समाज मे गहरी पैठ बनाने मे सफल रहे जिसमे पूर्व मे इन अपराधियों को पुलिस से भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग से भी इंकार नहीं किया जा सकता?

पुलिस की कार्रवाई उम्मीद जगाती है-

सरगुजा पुलिस की त्वरित नाकेबंदी ने यह स्पष्ट किया है कि सूचना तंत्र और अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत होने पर फरार अपराधियों के लिए रास्ते आसान नहीं हैं। अब चुनौती यह है कि गिरफ्तारियों के साथ उन नेटवर्क तक भी पहुंचा जाए जो अपराधियों को शरण, संपर्क या सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराते हैं। यही कार्रवाई सरगुजा की कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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