नशा मुक्त पंजाब बना चुनावी मुद्दा, मान सरकार पर विपक्ष का चौतरफा हमला
पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या अब केवल सामाजिक चिंता नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति, ड्रग्स के अवैध कारोबार और इससे जुड़े अपराधों को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार विपक्ष के निशाने पर है। भाजपा और कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दल लगातार मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।
पंजाब मे विपक्ष का आरोप है कि सरकार के दावों के बावजूद पंजाब में नशे का कारोबार पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है। भाजपा और कांग्रेस नेता मान सरकार पर ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अपेक्षित सख्ती नहीं बरतने और नशे के कारोबारियों को कथित संरक्षण मिलने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग मौकों पर कार्रवाई और नशे के खिलाफ अभियान तेज करने का दावा किया गया है।

नशा का मुद्दा अब पंजाब मे सीधे युवाओं के भविष्य और पंजाब की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ गया है। नशे के कारण परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक-सामाजिक दबाव, अपराध और आत्महत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
राजनैतिक जानकर बताते है कि आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस पंजाब मे जहां नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही हैं, वहीं आप सरकार अपने अभियान और कार्रवाई को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकती है। साफ है—‘नशा मुक्त पंजाब’ का नारा अब चुनावी जंग का सबसे बड़ा हथियार बनता दिख रहा है।






