महंगाई की मार से छोटे हुए गणपति, आस्था में नहीं आई कमी
छत्तीसगढ़ – मिट्टी, रंग और साज-सज्जा के सामान महंगे होने से मूर्तिकारों ने घटाया प्रतिमाओं का आकार गणेशोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल है, लेकिन इस बार महंगाई की मार भगवान गणेश की प्रतिमाओं पर भी दिखाई दे रही है। मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, रंग, सजावटी सामग्री और अन्य सामान के दाम बढ़ने से कलाकारों के सामने लागत और बिक्री के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इसका असर गणेश प्रतिमाओं के आकार पर भी पड़ा है। मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा प्रतिमाओं की सजावट, मुकुट, वस्त्र, आभूषण और रंग-रोगन पर होने वाला खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में बड़ी प्रतिमा तैयार करने पर लागत काफी बढ़ जाती है, जबकि श्रद्धालु भी बजट को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा खरीद रहे हैं। इसी कारण कई कलाकार अब पहले की अपेक्षा छोटी प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
हालांकि, प्रतिमाओं का आकार छोटा जरूर हुआ है, लेकिन भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्ति में कोई कमी नहीं आई है। कलाकार छोटी प्रतिमाओं में भी आकर्षक भाव-भंगिमा, सुंदर रंग संयोजन और पारंपरिक साज-सज्जा के जरिए गणपति का मनमोहक स्वरूप गढ़ रहे हैं।

मूर्तिकारों का कहना है कि उनके लिए गणेश प्रतिमा बनाना केवल रोजी-रोटी का साधन नहीं, बल्कि आस्था और कला से जुड़ा कार्य भी है। महंगाई के दौर में चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें नई ऊर्जा दे रही है।






