अंबिकापुर में जमीनों की हेराफेरी का बड़ा खेल! फर्जी दस्तावेजों से प्लॉट बिक्री के आरोप, तालाबों पर भी संकट

सरगुजा – सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में जमीनों की खरीद-बिक्री और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतों के अनुसार, फर्जी अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर बड़े भू-खंडों को प्लॉटिंग कर बेचने का कारोबार किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में राजस्व दस्तावेजों, जमीन के वास्तविक स्वरूप और पंजीयन प्रक्रिया की जांच की मांग तेज हो गई है।

सबसे गंभीर सवाल शहर के पुराने तालाबों की जमीन को लेकर उठ रहे हैं। शहर के मध्य प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप स्थित पुराने तालाब का अस्तित्व भी कथित भू-हेराफेरी और अतिक्रमण के चलते लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंचने की बात सामने आई है। यदि तालाबों की जमीन का स्वरूप बदलकर उसका उपयोग निजी प्लॉटिंग के लिए किया गया है, तो यह केवल राजस्व अनियमितता नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

बताया जाता है कि शिकायतों के बाद कलेक्टर ने मामले में सख्ती बरतते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने यह स्पष्ट करना चुनौती होगी कि जमीनों के दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए, उनका सत्यापन कैसे हुआ और संबंधित भूमि का वास्तविक राजस्व एवं भौतिक रिकॉर्ड क्या है।

वैसे इस पूरे मामले में कथित रूप से प्रभावशाली लोगों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के संरक्षण की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।

अंबिकापुर मे जमीनों के इन बड़े हेराफेरी से चिंतित लोगो का कहना है कि अंबिकापुर में अब जरूरत है कि शहर के सभी तालाबों और उनकी राजस्व जमीनों का विशेष सर्वे कराया जाए तथा संदिग्ध जमीन सौदों की स्वतंत्र जांच हो। साथ ही दस्तावेजों में हेराफेरी, फर्जीवाड़े और अवैध प्लॉटिंग में दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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