छत्तीसगढ़ हो या मध्यप्रदेश, सड़कों पर मवेशियों का कब्जा बरकरार
छत्तीसगढ़ हो या मध्यप्रदेश, महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़कों पर मवेशियों का कब्जा बड़ी समस्या बन गया है। शासन-प्रशासन के नियम फेल होते नजर आ रहे हैं। सड़कों पर बैठे और घूमते मवेशियों से लोग परेशान हैं और आए दिन हादसों में जान गंवा रहे हैं। हाईकोर्ट की फटकार और कड़े निर्देशों के बाद भी जिम्मेदार विभागों का मौन रहना आश्चर्यजनक है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग हो या राजमार्ग, शहर की सड़क हो या गांव की, हर जगह यही हाल है।रात के समय सड़क पर अचानक मवेशी आ जाने से वाहन चालक संभल नहीं पाते और भीषण दुर्घटना हो जा रही है। कई मामलों में वाहन चालकों के साथ मवेशियों की भी मौत हो रही है।विपक्षी दलों का आरोप है कि कोर्ट के निर्देश के बाद भी प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। मवेशियों को पकड़ने, गौठानों और कांजी हाउस तक पहुंचाने की व्यवस्था कागजों तक ही सीमित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा मवेशियों के मालिकों पर सख्त कार्रवाई, जुर्माना और सड़कों पर नियमित गश्त ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है, नहीं तो हादसों का सिलसिला थमने वाला नहीं है।






