हाथियों के आतंक से दहशत में जिला अनूपपुर के ग्रामीण,
छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में लगातार प्रवेश कर रहे हाथियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती जनहानि और फसलों के नुकसान को लेकर वहाँ के रहवासी दहशत मे रतजगा करने को विवश है अब इस संबंध मे अनूपपुर विधानसभा के विधायक एवं पूर्व मंत्री विसाहूलाल सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
विधायक ने पत्र में बताया कि जिला अनूपपुर के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर के कुछ हिस्से तथा कोतमा एवं पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुछ अंश छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के वनमंडल एवं वनपरिक्षेत्र मरवाही के सिवनी बीट अंतर्गत मलागाड़ी के जंगल से हाथियों का झुंड नाला पार कर ग्राम पंचायत एवं वनबीट चोलना होते हुए अनूपपुर में प्रवेश करता है। हाथियों के इस आवागमन से ग्रामीण लगातार परेशान हैं। हाथी फसलों, चरों तथा बाड़ियों में लगी सब्जियों को अपना आहार बनाते हुए भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, साथ ही सामने आने वाले ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें कुचल रहे हैं।
विधायक ने बताया कि अप्रैल 2011 से 30 अप्रैल 2026 के बीच हाथियों के हमले से 17 लोगों की जान गई है, जिनमें 12 पुरुष, 4 महिलाएं और 1 बालक शामिल है। कई मवेशियों को भी पटक-पटक कर मार डाला है ग्रामीणों का कहना है कि
वर्तमान मे हाथी दल किसानों के खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है वहीं कई स्थानों पर हाथियों द्वारा फसलों को खाने के साथ-साथ उन्हें पैरों से कुचलकर नष्ट किया जा रहा है। अभी हाथियों का झुंड घुसरिया बीट के लंगरा पहाड़ के जंगल में ठहरा हुआ है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में हाथियों के विचरण की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोग रेस्क्यू कर हाथियों को दूर छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन हाथी अपने पुराने मार्ग से ही लौट आते हैं।
इस संबंध मे प्रभावित लोगो ने मांग की है कि मलागाड़ी के जंगल तथा अनूपपुर जिले की सीमा के बीच हाथियों के आवागमन वाले मार्ग पर गहरी खाई (ट्रेंच लाइन) का निर्माण कराया जाए, ताकि उनके नियमित आवागमन वाले रास्ते को नियंत्रित किया जा सके और छत्तीसगढ़ की ओर से अनूपपुर जिले में प्रवेश की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
उनका यह भी कहना है कि वर्तमान में अनूपपुर जिले में घूम रहे हाथियों को वन विभाग के माध्यम से सुरक्षित रेस्क्यू कराकर अन्य प्रांतों के राष्ट्रीय उद्यानों में छोड़े जाने की व्यवस्था की जाए और ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई की जाए।






