मध्य प्रदेश के ‘बिट्टू तबाही’ ने 30 हजार में कर दिखाया वो करिश्मा, जो 2400 करोड़ का बजट भी नहीं कर पाया

राजगढ़ के 20 साल के युवा ने अकेले दम पर साफ की पूरी अजनार नदी- न तैरना आता था, न सरकार का सहारा – फिर भी जिद ने बदली तस्वीर- सीएम मोहन यादव ने किया सम्मानित- अब विदेश से मिला जॉब ऑफर

मध्यप्रदेश –

एक तरफ देश में नदियों की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये के बजट पास होते हैं, फाइलों में योजनाएं बनती हैं, बड़े-बड़े दावे होते हैं, लेकिन नदियां जस की तस गंदगी और काले पानी से भरी रहती हैं। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के एक 20 साल के लड़के ने मात्र 30 हजार रुपये में पूरी नदी को साफ करके पूरे सिस्टम को आइना दिखा दिया है।

हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के ब्यावरा कस्बे के सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ की।

कौन हैं बिट्टू तबाही?

राजगढ़ जिले के ब्यावरा कस्बे के बीच से बहने वाली अजनार नदी सालों से कचरे का डलाव बन चुकी थी। नालों का गंदा पानी, प्लास्टिक की बोतलें, पूजा सामग्री, काई और मलबा… लोगों ने इसे नियति मान लिया था।

बीएससी के छात्र बिट्टू मंदिर जाते समय रोज नदी की यह दुर्दशा देखते थे। 26 जनवरी 2026 को उन्होंने प्रण लिया – इस नदी को साफ करना है। हैरानी की बात यह है कि बिट्टू को तैरना तक नहीं आता था। न ग्लव्स थे, न गमबूट, न जेसीबी। बस एक फावड़ा और एक जिद।

उन्होंने नंगे हाथों से नदी में उतरकर कचरा निकालना शुरू किया। शुरुआत में दोस्त आए, फिर मजाक उड़ाकर चले गए। लोगों ने कहा – रील के लिए, लाइक्स के लिए दिखावा कर रहा है। लेकिन बिट्टू नहीं रुका। जेब से करीब 30 हजार रुपये जुटाकर डस्टबिन, फावड़े और सामान्य औजार खरीदे। लगातार गंदे पानी में रहने से हाथों में गंभीर इन्फेक्शन हो गया, फिर भी अभियान जारी रखा।

जब उन्होंने नदी की ‘पहले और बाद’ की वीडियो इंस्टाग्राम पर डाली, तो वीडियो वायरल हो गया। उसके बाद ब्यावरा नगर पालिका को भी आना पड़ा और जेसीबी-पोकलेन से मदद करनी पड़ी। आज अजनार नदी का बड़ा हिस्सा साफ हो चुका है।

30 हजार VS 2400 करोड़ VS 42000 करोड़: सिस्टम पर सवाल-

बिट्टू की इस कहानी ने देश में नदी सफाई के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बताया जाता है कि

– मध्य प्रदेश में ही नदियों के संरक्षण और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के नाम पर 2400 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट निर्धारित है। हजारों कर्मचारी, इंजीनियर, अफसर हैं। बावजूद इसके प्रदेश की छोटी नदियां नालों में तब्दील हो चुकी हैं।
– राष्ट्रीय स्तर पर नमामि गंगे जैसी योजनाओं के लिए अब तक 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा चुका है। सीएजी की कई रिपोर्ट कह चुकी हैं कि पैसा खर्च हुआ, लेकिन नदियां साफ नहीं हुईं।

ऐसे में एक अकेला युवा बिना टेंडर, बिना बजट, बिना कमीशन के तीस हजार रुपयों में नदी साफ कर देता है, तो यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि नीयत हो तो बजट मायने नहीं रखता, और नीयत न हो तो हजारों करोड़ भी कम पड़ जाते हैं। यह नदियों के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है।

देश-दुनिया में गूंजा नाम-

बिट्टू के जज्बे को देखकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर कहा था – “अगर लाइक्स की चाहत भी ऐसी नेक बन जाए तो सोशल मीडिया सार्थक है।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिट्टू को भोपाल बुलाकर मुख्यमंत्री निवास में सम्मानित किया और कहा – “पूरे प्रदेश को हमारे छोटे बिट्टू पर गर्व है।”

बात यहीं तक सिमित नहीं रही बल्कि अब तो इस कहानी की गूंज सात समंदर पार तक पहुंच गई है। दुनिया की सबसे बड़ी समुद्र सफाई संस्था ‘द ओशन क्लीनअप’ के फाउंडर और सीईओ बोयान स्लैट ने बिट्टू की वीडियो पर कमेंट किया है – “Come work for us” – हमारे लिए काम करो।

कहा जा सकता है बिट्टू तबाही ने अपनी अकेला चलो की सार्थक नीति से साबित कर दिया है कि क्रांति के लिए बड़ी मशीनों नहीं, बड़ी सोच की जरूरत होती है।

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