छत्तीसगढ़ मे डाग शेल्डर के दावे कागजो मे मजबूत धरातल पर खोखले
आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और डॉग बाइट की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ में कागजों पर इंतजाम तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कई जगहों पर जमीनी स्थिति इन दावों से उलट नजर आ रही है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर में इसका उदाहरण सामने है, जहां नगर पालिका ने डॉग शेल्टर तो तैयार कर दिया,लेकिन लोगो का कहना है कि शेल्टर खुलने के करीब नौ महीने बाद भी इसमें एक भी श्वान को नहीं रखा जा सका है। शेल्टर पर ताला लटका है और आवारा कुत्ते अब भी शहर की गलियों में घूम रहे हैं। व लोगो को घातक रूप से काट रहे है
सामने आई जानकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अपने 19 मई 2026 के फैसले में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए Animal Birth Control Rules, 2023 के तहत Capture-Sterilise-Vaccinate-Release (CSVR) व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नियम मौजूद होने के बावजूद कई राज्यों में उनका क्रियान्वयन प्रभावी नहीं रहा है।

राज्य में आंकड़े बड़े, लेकिन सवाल जमीनी अमल पर –
बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि राज्य में 34 एबीसी सेंटर संचालित हैं और जून 2026 तक 30,651 आवारा कुत्तों की नसबंदी, 50,362 को एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा 42,263 की डी-वॉर्मिंग की गई है। सरकार ने प्रदेश में 199 डॉग शेल्टर और 4,340 कुत्तों की क्षमता होने की भी जानकारी दी है।

लेकिन सवाल यह है कि इन आंकड़ों का असर शहरों और कस्बों की सड़कों पर कितना दिखाई दे रहा है? बैकुंठपुर का डॉग शेल्टर इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है।
शेल्टर बना, उपयोग नहीं हुआ-
कोरिया जिला के बैकुंठपुर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए बनाए गए शेल्टर का उद्देश्य कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़ना, आवश्यक प्रक्रिया के तहत नसबंदी व टीकाकरण करना और जरूरत के अनुसार उनका प्रबंधन करना था। मगर स्थानीय स्तर पर शेल्टर का संचालन ही नियमित नहीं हो पाया। नतीजा यह कि सरकारी संसाधन से तैयार भवन उपयोग के इंतजार में है और शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है।
यह स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा को राज्य और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी बताते हुए संस्थानों, अस्पतालों, स्कूलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थानों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।
खानापूर्ति से नहीं रुकेगा डॉग बाइट का खतरा-
इस सबंध मे जानकारों का कहना है कि सिर्फ शेल्टर का निर्माण कर देना या कागजों में नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य पूरा दिखाना पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना है कि अपर्याप्त नसबंदी, कमजोर प्रशासनिक क्रियान्वयन, कचरा प्रबंधन की कमी और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय का अभाव समस्या के प्रमुख कारण हैं।
छत्तीसगढ़ में सरकार ने एबीसी सेंटर, शेल्टर, एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन, फीडिंग स्पेस और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं का दावा किया है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने भी लगातार निगरानी की जरूरत बताई है और जिला स्तर पर अनुपालन की विस्तृत जानकारी मांगी है।
बैकुंठपुर का खामोश डॉग शेल्टर ऐसे में बड़ा सवाल है—जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना है, तो शेल्टर महीनों महीनों से एक भी श्वान क्यों नहीं? जिम्मेदारी किसकी है और खर्च हुए संसाधनों का उपयोग कब होगा?





