कांग्रेस की रैली के जवाब में भाजपा का सड़क अभियान तेज, लोकतंत्र बचाओ के नारे के साथ विपक्ष को घेरने की तैयारी
नई दिल्ली, –देश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच सड़क पर शक्ति प्रदर्शन का मुकाबला तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद भाजपा ने भी अपने राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान को तेज कर दिया है। भाजपा इस अभियान को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दे रही है।
भाजपा के दृष्टिकोण से यह अभियान विपक्ष के उन आरोपों का जवाब है, जिनमें चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने के बजाय जनता के सामने तथ्यों को रखना आवश्यक है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आंदोलन को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाला बताते हुए अपनी बात जनता तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई है।


इस अभियान के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों में पदयात्राओं, जनसभाओं तथा प्रेस वार्ताओं में भाग लिया है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है। पार्टी का लक्ष्य विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देना और अपने समर्थकों को संगठित करना है।
आगे भी सड़कों पर ऐसी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। भाजपा के अभियान से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को अपने मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने की चुनौती मिल सकती है। हालांकि, इससे विपक्ष की रैलियां बंद होंगी या उनका प्रभाव समाप्त हो जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन और जनसभाएं जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने का माध्यम हैं। आने वाले दिनों में सड़क पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।





