संवेदनशीलता और सेवा की मिसाल बनीं कोरिया कलेक्टर रुक्तिमा यादव, दिव्यांग बच्चों के जीवन में जगाई उम्मीद की नई किरण
छत्तीसगढ़ – कोरिया – मानवता की सच्ची पहचान दूसरों के दर्द को महसूस करने और उनके जीवन में खुशियों के रंग भरने में है। इसी संवेदनशीलता और सेवा भावना की प्रेरक मिसाल पेश करते हुए कोरिया कलेक्टर रुक्तिमा यादव ने शारीरिक दिव्यांगता से जूझ रहे बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है।
कोरिया जिला प्रशासन की पहल पर ऐसे 125 बच्चों का विशेष परीक्षण कराया गया, ताकि उनकी शारीरिक स्थिति को समझकर उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इस मानवीय प्रयास के तहत पात्र बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया गया। इतना ही नहीं, जरूरत के अनुसार उन्हें निशुल्क सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनके जीवन की कठिनाइयां कम होंगी और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे।

यह पहल केवल सरकारी दायित्वों का निर्वहन नहीं, बल्कि उन मासूम चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास है, जिनके सपने परिस्थितियों के कारण कहीं पीछे छूट जाते हैं। जब किसी बच्चे को सहारा मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और उसके भीतर आगे बढ़ने की नई ललक जन्म लेती है।
धार्मिक दृष्टि से भी सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। जरूरतमंद की सहायता करना, असहाय के जीवन में आशा जगाना और किसी के दुख को कम करना ईश्वर की सच्ची आराधना है। इसी भावना को साकार करता कोरिया प्रशासन का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।
कलेक्टर रुक्तिमा यादव की संवेदनशील पहल यह संदेश देती है कि सच्चा विकास वही है, जिसमें कोई बच्चा पीछे न छूटे और हर सपने को उड़ान भरने का अवसर मिले।





