नारियल उत्पादन में चमका छत्तीसगढ़ –देश के 11 DSP प्रक्षेत्रों में नंबर-1 बना कोंडागांव

विश्व नारियल दिवस पर खास रिपोर्ट- समुद्र से 1500 किमी दूर भी लहलहा रहा है बस्तर का नारियल, –सालाना 3 लाख उत्पादन,- 50 हजार पौधे हर साल तैयार,- रायपुर के थोक बाजार में रोज 45-48 लाख का कारोबार-
छत्तीसगढ़ —

नारियल की खेती के लिए समुद्र का किनारा सबसे मुफीद माना जाता है। यही वजह है कि कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्य देश के 82 प्रतिशत नारियल उत्पादन के केंद्र हैं। लेकिन इस मिथक को तोड़ा है समुद्र से करीब 1500 किमी दूर छत्तीसगढ़ के बस्तर ने।

विश्व नारियल दिवस के मौके पर अच्छी खबर यह है कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन स्थापित प्रदर्शन सह बीज उत्पादन प्रक्षेत्र में कोंडागांव का प्रक्षेत्र देश के 11 DSP प्रक्षेत्रों में सालाना नारियल उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर है।

100 एकड़ में 6000 पेड़, 3 लाख नारियल-

1987 में कोंडागांव जिले के कोपाबेड़ा में नारियल विकास बोर्ड की शुरुआत हुई थी। आज करीब 100 एकड़ में फैले इस प्रक्षेत्र में 6000 नारियल के पेड़ हैं, जिनमें से 4600 पेड़ों से सालाना 3 लाख से अधिक नारियल का उत्पादन हो रहा है।

नारियल विकास बोर्ड के अधिकारियो के अनुसार – “यह प्रक्षेत्र देश के 11 DSP में उत्पादन के मामले में पहले नंबर पर है। यहां से बोर्ड को सालाना करीब एक करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है।” यहां होने वाले नारियल की 60 प्रतिशत खपत स्थानीय स्तर पर और शेष राज्य के अन्य इलाकों में होती है।अधिकारियो के अनुसार
यह प्रक्षेत्र केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है।यहाँ

– 18 प्रजातियां: यहां बौनी (Dwarf), टॉल (Tall) और संकर (Hybrid) किस्मों की 18 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। कुल उत्पादन का 70 फीसदी इन्हीं तीन प्रजातियों से आता है।

– नर्सरी: हर साल 50 हजार से ज्यादा नारियल के पौधे तैयार कर किसानों को बेचे जाते हैं। सबसे ज्यादा मांग ओडिशा, महाराष्ट्र और विदर्भ के किसानों से है। 2002 से अब तक 16 लाख से अधिक पौधे बांटे जा चुके हैं। हाल ही में विदर्भ के 50 किसानों ने यहां आकर आधुनिक खेती मॉडल का अध्ययन भी किया।

– लंबी उम्र: नारियल का पौधा 4 से 5 साल में फल देना शुरू करता है और 60 से 70 साल तक लगातार फल देता है।

– इंटर-क्रॉपिंग: यहां नारियल के साथ आम, लीची, कोको, दालचीनी और काली मिर्च की अंतरफसल भी ली जा रही है, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो रही है।

छत्तीसगढ़ में समुद्र नहीं फिर भी नारियल की मांग आसमान पर है। बताया जाता है कि

– *रायपुर थोक बाजार मे रोजाना 45 से 48 लाख रुपये का कारोबार होता है व पूरे प्रदेश में हर महीने लगभग 60 करोड़ का कारोबार।
– आवक: रायपुर में रोजाना 2 लाख से अधिक नारियल की आवकमानी गई है मुख्य आयात तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश से होती है

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार 2014-15 में देश में 140 लाख मीट्रिक टन उत्पादन था जो अब 153.29 लाख मीट्रिक टन हो गया है और भारत दुनिया में नंबर-1 है। दुनिया के कुल नारियल का 30.37 प्रतिशत अकेले भारत पैदा करता है।

ऐसे में कोंडागांव जैसे गैर-परम्परागत क्षेत्रों का मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन गया है कि वैज्ञानिक खेती से रेगिस्तान में भी समुद्र का स्वाद उगाया जा सकता है।

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