सरकारी जागरूकता अभियान बेअसर- तकनीकी रूप से मजबूत ठग पुलिस के लिए बने सिरदर्द
कम समय में पैसा दोगुना करने और रातों-रात धनवान बनने का लालच अब साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। सरकार और पुलिस लगातार साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं, बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग ठगों के बुने जाल में फंसकर अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस ठगी के शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित लोग और अधिकारी तक हो रहे हैं। हाल ही मे प्रदेश के अबिकापुर मे एक युवक द्वारा सब कुछ गवाने के बाद जब साइबर थाने की शरण मे आये तो पता चला कि ठगों ने 40% से 200%तक मुनाफे का झांसा देकर उससे दस लाख से ज्यादा की साइबर ठगी कर ली
इस संबंध मे जानकर बतलाते है कि साइबर ठग पहले व्हाट्सएप ग्रुप में लोगों को जोड़ते हैं। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट या मोबाइल एप पर निवेश के नाम पर आईडी बनवाई जाती है। शुरुआत में ठग बेहद कम रकम निवेश करवाते हैं और कुछ ही समय में मुनाफे के साथ रकम वापस भेजकर पीड़ित का विश्वास जीत लेते हैं। पैसा दोगुना होने का लालच बढ़ते ही पीड़ित बड़ी रकम लगाने लगता है।

इसके बाद शुरू होता है असली खेल। कभी टैक्स, कभी सिक्योरिटी मनी, कभी प्रोसेसिंग फीस तो कभी अकाउंट अपग्रेड के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती है। जब तक पीड़ित को ठगी का अहसास होता है, तब तक उसकी बड़ी रकम कई खातों के जरिए इधर-उधर की जा चुकी होती है।
सब कुछ लुट जाने के बाद पीड़ित साइबर थानों के चक्कर काटता है। तब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती रकम को तत्काल ट्रेस कर वापस कराना और ठगों तक पहुंचना होती है।

बताया जाता है कि साइबर अपराधियों ने तकनीक, फर्जी वेबसाइट, सोशल इंजीनियरिंग और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का इस्तेमाल करने में महारत हासिल कर ली है। यही कारण है कि लगातार कार्रवाई के बावजूद साइबर ठगी पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बनती जा रही है।
कहा जा सकता है कि सरकार की जागरूकता मुहिम अपनी जगह है, लेकिन जब तक लोग असाधारण मुनाफे के लालच पर ब्रेक नहीं लगाएंगे, तब तक साइबर ठगों का यह कारोबार चलता रहेगा। आखिर लालच बुरी बला है—और साइबर दुनिया में यही लालच वर्तमान मे सबसे महंगा साबित हो रहा है।





