UPI पेमेंट पर नया नियम, ₹2,000 से ज्यादा के लेनदेन पर लगेगा 0.4% MDR
भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने UPI के चुनिंदा Merchant Transactions पर नया Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने की घोषणा की है। नए नियम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI transactions पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।
इस नए नियम को लेकर सबसे अहम बात यह है कि यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है। MDR मुख्य रूप से व्यापारी और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच लागू होगा। वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा।

NPCI के अनुसार, ₹2,000 तक के छोटे मूल्य वाले UPI Merchant Transactions पर कोई MDR नहीं होगा। ऐसे छोटे लेनदेन UPI के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतानों पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
नए नियम में बड़े लेनदेन के लिए अधिकतम शुल्क की सीमा भी तय की गई है। ₹75,000 या उससे ज्यादा के सामान्य Merchant UPI Transaction पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे कुछ विशेष क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

NPCI का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन, इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और भविष्य के विकास से जुड़े खर्चों के लिए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को ज्यादा टिकाऊ बनाना है। हालांकि ग्राहकों के लिए UPI भुगतान की सुविधा जारी रहेगी और छोटे मूल्य के लेनदेन पर कोई MDR नहीं होगा।
यानी साफ शब्दों में कहें तो UPI पूरी तरह से चार्जेबल नहीं हुआ है। ₹2,000 तक के छोटे Merchant Payments और Person-to-Person Payments पर शुल्क नहीं लगेगा, जबकि ₹2,000 से अधिक के कुछ Merchant Transactions पर 15 अक्टूबर से नया MDR ढांचा लागू होगा।





