उज्जैन मे खडे हनुमान ने प्रशासन को दिखाई अपनी शक्ति – हैवी मशीने भी मानी हार

देश में जहां कम बजट में बनी फिल्म हनु अंश अपनी सफलता के नए रिकॉर्ड बना रही है और इसकी लोकप्रियता को देव हनुमान के अनन्य भक्त नीम करोली बाबा की आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आया खड़े हनुमान का एक प्रसंग इन दिनों धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

बताया जाता है कि महाकाल नगरी उज्जैन मे सड़क चौड़ीकरण के मार्ग में आ रहे खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अमले के सामने उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जब भारी-भरकम मशीनों से प्रयास करने के बावजूद बजरंगबली की प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। बताया जाता है कि कई घंटे और लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। श्रद्धालुओं ने इसे बजरंगबली की शक्ति और प्रताप से जोड़कर देखा

स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले शासकीय अधिकारियो द्वारा धार्मिक रीति-रिवाज और विधि-विधान का पालन नहीं किया गया था। और प्रशासनिक स्तर पर मशीनों के माध्यम से प्रतिमा हटाने के प्रयास आरम्भ किए गएथे लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों को धार्मिक परंपराओं के पालन की आवश्यकता का एहसास हुआ और विद्वानों के मार्गदर्शन में विधिवत पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार तथा धार्मिक क्रियाएं कराई गईं।

जिसके बाद उज्जैन मे जो नजर आया वह आश्चर्य करने वाला था है प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार पूजा-विधान के बाद जब खडे हनुमान जी से नए स्थान पर विराजमान होने की प्रार्थना की गई तो परिस्थितियां बदल गईं। जिस प्रतिमा को भारी मशीनें कई घंटों तक नहीं हिला सकीं, वह धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आसानी से अपने निर्धारित स्थान पर स्थापित हो गई।

यह घटनाक्रम अब केवल एक प्रतिमा के स्थानांतरण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रसंग बन गया है। भक्त इसे हनुमान जी के तेज, शक्ति और प्रताप से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में मूर्ति केवल पत्थर का स्वरूप नहीं होती। प्राण-प्रतिष्ठा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से उसमें देवत्व की अनुभूति की जाती है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था उस स्वरूप से जुड़ती है।

श्रद्धालुओं के बीच यह भावना भी प्रबल है कि उज्जैन के खड़े हनुमान ने अपने तरीके से यह संदेश दिया कि सनातन में देव प्रतिमाओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और विधि-विधान का कितना महत्व है। आस्था रखने वाले लोग उज्जैन के इस पूरे प्रसंग को बजरंगबली की महिमा और भक्ति की शक्ति का प्रतीक मान रहे हैं।

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