झारखंड में सरकारी डॉक्टरों का बड़ा आंदोलन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी, स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराया संकट
झारखंड में सरकारी डॉक्टरों का अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज होने की संभावना है। चिकित्सकों ने पदोन्नति, वेतन संबंधी लाभ, नियमित नियुक्ति और सेवा शर्तों में सुधार की मांग को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया, तो अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।
इस आंदोलन में राज्य के लगभग 1,200 सरकारी चिकित्सकों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

पदोन्नति और सेवा लाभ को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी
झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ यानी झासा के नेतृत्व में सरकारी चिकित्सक लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को उठाते रहे हैं।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन यानी डीएसीपी व्यवस्था लागू करना शामिल है। चिकित्सकों का कहना है कि केंद्र सरकार और बिहार की तर्ज पर झारखंड के डॉक्टरों को भी निर्धारित समय पर करियर में प्रगति और वित्तीय लाभ मिलने चाहिए।
संघ ने एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए 20 वर्षों की सेवा अवधि में चार डायनेमिक एसीपी देने की मांग की है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए भी स्पष्ट पदोन्नति व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया गया है।
राज्य में डॉक्टरों के 1,422 पद खाली होने का दावा
झासा के अनुसार, राज्य में चिकित्सकों के लगभग 1,422 स्वीकृत पद रिक्त हैं। संगठन ने इन पदों पर नियमित भर्ती करने और नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की मांग की है।
चिकित्सकों का कहना है कि एक तरफ सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
डॉक्टरों ने संविदा नियुक्ति नियमावली में बदलाव की भी मांग की है, ताकि राज्य के योग्य चिकित्सकों को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
सेवानिवृत्ति आयु घटाने का भी विरोध
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष किए जाने के निर्णय पर भी नाराजगी जताई है।
चिकित्सक संघ का कहना है कि सेवा शर्तों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले संबंधित संगठनों से चर्चा की जानी चाहिए।
संघ ने सरकार से इन मुद्दों पर बातचीत कर समयबद्ध समाधान निकालने की मांग की है।





