ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में तकनीक, व्यापार और अपराध के खिलाफ साझा रणनीति पर जोर -भारत मे आयोजित हो रहा है ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली – भारत में 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम, नई दिल्ली में होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सम्मेलन में तकनीकी विकास, व्यापार, ऊर्जा, कृषि और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत इस बार एजेंडा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।
सम्मेलन के प्रमुख प्रस्तावों में आर्थिक अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में वित्तीय एवं जांच संबंधी सूचनाओं के तेज, सुरक्षित और समयबद्ध आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी ढांचा विकसित करना शामिल है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों में आर्थिक अपराध कर भागने वाले अपराधियों की पहचान, उनकी संपत्ति का पता लगाने और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।

जानकर बताते है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से भगोड़े अपराधियों और आतंकवाद से जुड़े संदिग्धों की पहचान तथा सूचनाओं के विश्लेषण की संभावनाओं पर भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे जांच एजेंसियों के बीच अंतरराष्ट्रीय समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।
कहा जाता है कि ब्रिक्स के एजेंडे में कृषि, बीज, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग भी महत्वपूर्ण स्थान रखेंगे। बीज और कृषि तकनीक में साझेदारी विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर सकती है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग वैश्विक आपूर्ति और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

साझा बयान को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में सम्मेलन की सफलता केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने की सामूहिक क्षमता से तय होगी।
ब्रिक्स का बढ़ता दायरा यह संकेत देता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक शासन व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती हैं। यदि सदस्य देश सूचना साझा करने, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में ठोस तंत्र विकसित करते हैं, तोउम्मीद की जानी चाहिए कि ब्रिक्स आने वाले वर्षों में बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था का अधिक प्रभावशाली मंच बन सकता है।





