ध्वनि प्रदूषण पर मौन क्यों है शासन-प्रशासन? डीजे के जानलेवा शोर से सरगुजा संभाग बेहाल, नियमों की उड़ रही धज्जियां!
एमसीबी के कॉलरी क्षेत्रों में सबसे बुरे हालात, शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में ध्वनि प्रदूषण अब महज असुविधा नहीं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सुरक्षित जीवन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। खासकर एमसीबी जिले के चिरमिरी सहित कॉलरी क्षेत्रों में तेज आवाज में बजते डीजे के शोर से लोग परेशान हैं। सवाल यह है कि जब ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए नियम मौजूद हैं, तो फिर सड़कों और आबादी वाले इलाकों में इनकी खुलेआम धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं?
स्थानीय लोगों और व्यापारियों की शिकायत है कि डीजे की कानफोड़ू आवाज से हृदय रोगियों, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। तेज कंपन के कारण दुकानों में रखा सामान तक गिरने की शिकायतें सामने आती हैं। आरोप है कि पुलिस थानों में शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से तेज आवाज में डीजे बजाने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं।

एमसीबी जिला के चिरमिरी थाना क्षेत्र में व्यापारी संघ द्वारा भी पत्र सौप कर ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग उठाई गई थी। इसके बावजूद यदि शिकायतकर्ताओं को राहत नहीं मिलती, तो पुलिस की जवाबदेही तय करना जरूरी है। आखिर कानून लागू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी कब सक्रिय होंगे?

इस सबंध मे सामाजिक संगठनों व लोगों ने सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा से पूरे संभाग में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है। मांग है कि डीजे बजाने के लिए निर्धारित समय, नियमानुसार ध्वनि सीमा और अन्य कानूनी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए संबंधित पुलिस थानों से नियमों के अनुरूप लिखित अनुमति और आवश्यक शर्तों की स्पष्ट जानकारी देने की व्यवस्था हो।
वास्तव मे छत्तीसगढ़ मे ध्वनि प्रदुषण से परेशान लोगो ने शासन प्रशासन से अब सीधा सवाल किया है कि —नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कब होगी? केवल चेतावनी देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं हो सकती। उल्लंघन पर डीजे बंद कराने, नियमानुसार उपकरण जब्त करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। कहा जा सकता है कि शासन-प्रशासन को किसी गंभीर हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल कदम उठाने चाहिए। नागरिकों की सेहत और शांति से बढ़कर कोई मनोरंजन नहीं हो सकता।





